आकर्षण क्यों खो जाता है?
शादी एक इंसान के जीवन का एक महत्वपूर्ण पल है, जब उसकी जिंदगी लगभग बदल जाती है। एक नया इंसान आपकी जिंदगी में आपके हमसफ़र बनकर आता है, और यह जीवन का सफर बेहतर बनाने के लिए होता है। मैं यहां एक पुरुष के नज़रिए से बात कर रहा हूँ, इसलिए शादी को महत्वपूर्ण मानता हूँ और अन्य संबंधों, जैसे कि बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड को सही नहीं समझता। इसलिए, मैं यहां सिर्फ शादीशुदा जीवन की ही बात करूंगा।
यह रिश्ता इतना खास होता है, फिर भी अक्सर लोगों की शादीशुदा जिंदगी समय के साथ पहले जैसी नहीं रहती। जब हम किशोरावस्था में होते हैं, तो हमें लगता है कि प्यार एक खूबसूरत एहसास है, और हम हमेशा अपने साथी के साथ खुशी से रहेंगे। लेकिन जब हम समाज में शादीशुदा जोड़ों को देखते हैं, तो पाते हैं कि वे शुरुआत में तो बहुत खुश और रोमांचित दिखते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उनका रिश्ता सामान्य हो जाता है। हमें उनमें वह प्यार और आकर्षण नहीं दिखता, जिसकी हम उम्मीद करते हैं।
ऐसा क्यों होता है? क्या सच में प्यार हमेशा के लिए नहीं रहता? क्या हमें वह साथी मिलेगा, जिसके साथ हम वैसा ही प्यार महसूस कर पाएंगे, जैसा हमने कल्पना की थी? या फिर हमारी शादी भी बाकी जोड़ों की तरह एक बंधन बनकर रह जाएगी? इन सवालों के जवाब खोजने के लिए हमें यह समझना होगा कि शादी के बाद आकर्षण क्यों कम हो जाता है।
1 – क्वालिटी टाइम ओवर ओवरटाइम
जब शादी होती है, तो आपको प्रकृति की सबसे अनमोल चीज़ मिलती है—आपकी पत्नी। हमारा दिमाग इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि हम सामने वाले इंसान के साथ जितना भी समय बिताएं, शुरुआत में उसका मन नहीं भरता। लेकिन यही चीज आकर्षण को खत्म करने लगती है।
एक उदाहरण लेते हैं—मान लीजिए कि आपको कोई खास पसंदीदा खाना बहुत अच्छा लगता है। अगर आपको वही खाना रोज़ खाने को मिले, तो क्या होगा? शुरू में आप बड़े चाव से खाएंगे, लेकिन कुछ दिनों बाद आपका मन भरने लगेगा। फिर वह खाना सामान्य लगने लगेगा, और कुछ समय बाद आप उससे बोर भी हो सकते हैं।
इसे इकोनॉमिक्स के एक प्रसिद्ध नियम से समझा जा सकता है—"डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी"। इसका मतलब है कि जब कोई व्यक्ति किसी वस्तु का बार-बार उपभोग करता है, तो उससे मिलने वाला आनंद धीरे-धीरे कम होने लगता है, और एक समय के बाद वह लगभग शून्य हो जाता है।
शादीशुदा रिश्ते में भी यही नियम लागू होता है। जब आप अपने पार्टनर के साथ लगातार समय बिताते हैं, तो धीरे-धीरे आकर्षण कम होने लगता है। यही कारण है कि शुरू में जो प्रेमपूर्ण एहसास था, वह समय के साथ फीका पड़ जाता है।
2 – फिजिकल एट्रीब्यूट्स ओवर मेंटल और स्पिरिचुअल एट्रीब्यूट्स
शारीरिक विशेषताओं के कारण आकर्षण का कम हो जाना सामान्य है। अगर आप अपने पार्टनर को सिर्फ उसके खूबसूरत चेहरे या आकर्षक शरीर के आधार पर पसंद करते हैं, तो जल्दी ही आपका आकर्षण फीका पड़ जाएगा और रिश्ते में नीरसता आ जाएगी।
शारीरिक गुण आकर्षण में अल्पकालिक भूमिका निभाते हैं, लेकिन दीर्घकालिक रिश्तों में इनका महत्व बेहद कम होता है। इंसान का आकर्षण वैसे ही कम हो जाता है जैसे कोई नई चीज़ कुछ समय बाद पुरानी लगने लगती है। जब किसी व्यक्ति की खूबसूरती या शारीरिक बनावट के आधार पर ही प्यार किया जाता है, तो वह प्रेम भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से गहरा नहीं हो पाता।
शुरुआती दौर में यह आकर्षण बहुत मज़बूत लगता है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी चमक फीकी पड़ जाती है। यही कारण है कि कई लोग शादी के कुछ समय बाद अपने साथी के प्रति आकर्षित महसूस नहीं करते, क्योंकि उनका रिश्ता केवल शारीरिक विशेषताओं पर आधारित था।
3 – अगर आपके जीवन में यह पहला रिश्ता नहीं है
अगर आपके जीवन में यह आपका पहला रिश्ता नहीं है, तो यह संभावना अधिक होती है कि आपके रिश्ते में आकर्षण धीरे-धीरे कम हो जाएगा।
मैंने कई लोगों को देखा है जो पहले किसी न किसी रिलेशनशिप में रह चुके थे—कुछ एक बार, तो कुछ कई बार। खास बात यह है कि जिनके ज्यादा एक्स-पार्टनर रह चुके होते हैं, उनके लिए एक व्यक्ति के साथ पूरी ज़िंदगी बिताना मुश्किल हो जाता है।
कल्पना करें कि आप एक बगीचे में हैं और हर फूल को सूंघने की इच्छा रखते हैं। अगर आप हर फूल की खुशबू के आदी हो चुके हैं, तो क्या आप सिर्फ एक फूल की खुशबू से संतुष्ट हो सकते हैं?
रिश्तों में भी यही होता है। जब किसी व्यक्ति के कई पार्टनर रह चुके होते हैं, तो वह एक के साथ स्थायी रूप से संतुष्ट नहीं रह पाता। जो लोग अपने पहले और आखिरी रिश्ते में होते हैं, उनके लिए अपने साथी में आकर्षण खोने की संभावना बहुत कम होती है।
4 – खुद को बहुत ज्यादा एक्सपोज़ करना-
अगर आप अपने रिश्ते में बहुत ज्यादा शारीरिक रूप से खुद को एक्सपोज़ करते हैं, तो आकर्षण जल्दी खत्म हो सकता है।
कभी आपने गौर किया है कि जब आप सड़क पर किसी जिम मॉडल का पोस्टर देखते हैं, तो पहली बार आपको वह बहुत आकर्षक लगती है? लेकिन अगर वही पोस्टर आपको रोज़ दिखे, तो कुछ दिनों बाद आपको उसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं रह जाती।
यही चीज़ आपके रिश्ते में भी होती है। जब आप और आपका पार्टनर एक-दूसरे के सामने बार-बार खुद को पूरी तरह एक्सपोज़ करते हैं, तो धीरे-धीरे आकर्षण कम होने लगता है। एक समय ऐसा भी आता है जब आप एक-दूसरे को देखकर भी पहले जैसी भावना महसूस नहीं करते।
5 – रिश्ते की बुनियाद मटेरियलिस्टिक होना
अगर कोई रिश्ता सिर्फ शारीरिक आकर्षण और भौतिक सुखों पर आधारित है, तो वह ज्यादा समय तक नहीं टिकता।
अक्सर लोग अपने साथी को उसकी खूबसूरती, बॉडी, या किसी अन्य भौतिक विशेषता के कारण पसंद करते हैं और रिश्ते में आते हैं। लेकिन जब वही चीज़ धीरे-धीरे सामान्य लगने लगती है, तो प्यार खत्म होने लगता है।
अगर रिश्ते की नींव केवल शारीरिक आकर्षण पर रखी जाए, तो वह सिर्फ तब तक चलता है जब तक वह आकर्षण बना रहता है। जैसे ही वह खत्म होता है, रिश्ता भी खत्म हो जाता है। इसलिए, अगर किसी रिश्ते में दीर्घकालिक स्थिरता चाहिए, तो उसे केवल शारीरिक आकर्षण पर आधारित नहीं होना चाहिए।
निष्कर्ष
अब इन पांच कारणों को जानने के बाद यह भी ज़रूरी है कि हम इसे कैसे ठीक कर सकते हैं। समाधान हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकता है। हो सकता है कि एक तरीका
1: क्वालिटी टाइम ओवर ओवरटाइम
जैसा कि मैंने पहले बताया, अगर आप अपने साथी को जरूरत से ज्यादा समय देते हैं, तो आपका आकर्षण धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसलिए ज़रूरी है कि अपने रिश्ते को उसी गति से आगे बढ़ाएं, जैसा कि भविष्य में होगा। बिना वजह काम से छुट्टी लेकर पत्नी के साथ समय बिताना उस पल के लिए आनंददायक हो सकता है, लेकिन आगे चलकर यह आकर्षण को कम कर सकता है।
इसलिए यह ज़रूरी है कि दोनों के मिलने का समय सीमित हो, जैसे कि रोज़ाना दो से तीन घंटे। इससे मिलने की स्वाभाविक इच्छा बनी रहेगी और जब आप मिलेंगे, तो आकर्षण अपने आप बढ़ेगा। जितना आप दूरी बनाएंगे, पास आने पर उतना ही ज्यादा आनंद महसूस होगा।
अगर बिना ज़रूरत के या बिना इच्छा के समय बर्बाद किया जा रहा है, तो यह धीरे-धीरे रिश्ते से आकर्षण को कम कर देगा। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें और जब लगे कि अब मिलने की इच्छा चरम पर है, तभी मिलें। ठीक वैसे ही जैसे जब हम बहुत भूखे होते हैं, तो खाने का स्वाद और भी ज्यादा अच्छा लगता है।
2: मानसिक और आध्यात्मिक गुणों को शारीरिक आकर्षण से अधिक प्राथमिकता दें
अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता हमेशा मजबूत और जीवंत बना रहे, तो शारीरिक आकर्षण को कभी भी रिश्ते का आधार न बनाएं। शारीरिक आकर्षण न तो स्थायी होता है और न ही एक समान बना रहता है। अगर रिश्ते की नींव सिर्फ सामने वाले के शरीर पर टिकी है, तो जब यह आकर्षण समय के साथ कम होगा, तब रिश्ते का आधार भी कमजोर होता जाएगा।
आज के भौतिकवादी दौर में लोग केवल शारीरिक सुख की तलाश में रहते हैं, वह भी अलग-अलग पार्टनर्स के साथ। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि शारीरिक आकर्षण बहुत ही छोटी अवधि का होता है और उदार समाज में यह आम बात बन गई है। इसलिए रिश्ते की नींव अपने साथी के मानसिक और आध्यात्मिक गुणों पर रखें।
अपने साथी की समझदारी, अच्छे व्यवहार, परोपकारिता जैसी चीज़ों को प्राथमिकता दें। जब आपका साथी बूढ़ा हो जाएगा, तब भी ये गुण उसमें बने रहेंगे। अगर ये गुण उसमें जीवनभर बने रहते हैं, तो आपका रिश्ता भी जीवनभर मजबूत रहेगा।
कुछ अन्य आध्यात्मिक गुण जैसे– सच्चाई, दयालुता, सत्यनिष्ठा आपके प्रेम को प्रकट करते हैं। अगर आपके साथी में ये गुण मौजूद हैं, तो यही चीजें आपके रिश्ते को स्थायित्व देंगी। इसलिए अपने मन को नियंत्रित रखें और कोई भी रिश्ता बनाने से पहले इन चीजों को अच्छी तरह समझ लें।
3: यह आपका पहला और आखिरी रिश्ता होना चाहिए
उदारवाद के इस दौर में हर व्यक्ति शारीरिक सुखों के पीछे इतना पागल है कि वह यह नहीं समझता कि इसका प्रभाव उसके जीवन पर क्या पड़ेगा। जीवन में उस पहले प्यार को अनुभव करने का सौभाग्य बहुत कम लोगों को ही मिलता है। जब आपको अपना पहला प्यार होता है, तो आपको पूरी तरह से लगता है कि इसके साथ मेरा पूरा जीवन बेहतरीन होगा और हम हमेशा साथ रहेंगे। लेकिन अगर वह आपको नहीं मिलता, तो आपको किसी के होने की असली कद्र समझ में आती है।
पहला प्यार जीवन में एक अनमोल अनुभव होता है, जो आपके अंदर एक गहरी भावना को जन्म देता है। जब आप इसे खो देते हैं, तभी आपको एहसास होता है कि वह व्यक्ति आपके जीवन में कितनी अहमियत रखता था। कई बार लोग अपने जीवन में दोबारा वैसा प्यार नहीं कर पाते, क्योंकि पहला प्यार एक मासूमियत और गहराई के साथ आता है, जिसे बार-बार दोहराना मुश्किल होता है।
इसीलिए, अगर वह आपका पहला प्यार है, तो उसे जाने न दें। उसे संभालकर रखें, क्योंकि जीवन में सच्चा और गहरा प्रेम बार-बार नहीं मिलता।
4- अपनी हया (संकोच) को बचाकर रखें
पति-पत्नी को एक-दूसरे के सामने शरीर का अनावश्यक प्रदर्शन कम करना चाहिए। हां, आप कह सकते हैं कि हमें यह करने की पूरी आज़ादी है और यह सब पुरानी बातें हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इससे आपके रिश्ते पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? अगर आप हर चीज़ अपने जीवनसाथी को पहले ही दिखा देंगे, तो फिर आकर्षण कैसे बना रहेगा?
रिश्तों में आकर्षण तब तक बना रहता है जब तक कि कुछ चीजें एक-दूसरे के लिए रहस्य बनी रहें। अगर आप अपने दोस्त के सारे राज़ पहले से ही जान लें, तो क्या उसमें कोई दिलचस्पी रहेगी? शायद नहीं। इसी तरह, अगर पति-पत्नी के बीच शारीरिक आकर्षण का रहस्य खत्म हो जाए, तो रिश्ता भी धीरे-धीरे नीरस लगने लगेगा।
इसलिए, कोशिश करें कि अपने शरीर का प्रदर्शन कम करें और एक-दूसरे के प्रति स्वाभाविक आकर्षण बनाए रखें। जब तक यह स्वाभाविक इच्छा और उत्सुकता बनी रहेगी, तब तक आपका रिश्ता भी मधुर और जीवंत बना रहेगा।
5- भौतिकवाद (Materialism) से बचें
अगर आप एक लंबा और खुशहाल रिश्ता चाहते हैं, तो केवल बाहरी सुंदरता और शारीरिक आकर्षण को प्राथमिकता न दें। लंबे और स्थायी रिश्ते कभी भी शारीरिक आकर्षण पर नहीं टिकते, क्योंकि समय के साथ यह आकर्षण कम होता जाता है।
आज के समाज में भौतिकवाद इस कदर बढ़ गया है कि लोग सिर्फ शरीर को महत्व देते हैं और गहरी भावनाओं को नज़रअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर आपके रिश्ते की नींव सिर्फ शारीरिक आकर्षण पर टिकी है, तो जब वह आकर्षण कम हो जाएगा, तो रिश्ता भी कमजोर पड़ने लगेगा।
जो चीज़ें रिश्ते को मजबूत बनाती हैं, वे हैं - ईमानदारी, समझदारी, दयालुता, और आपसी सम्मान। अगर आपका रिश्ता इन गुणों पर आधारित है, तो यह जीवनभर चलेगा। लेकिन अगर यह केवल भौतिक चीज़ों पर टिका है, तो यह जल्द ही कमजोर हो जाएगा।
इसलिए, हमेशा अपने रिश्ते की बुनियाद बाहरी सुंदरता की बजाय आंतरिक गुणों पर रखें, क्योंकि यही आपके रिश्ते को सच्चे मायने में मजबूत बनाएगा।
तो यह था मेरे ज्ञान और अनुभव का एक छोटा सा अंश। इस ब्लॉग में हर विषय को मैंने संक्षेप में प्रस्तुत किया है, वरना इस ब्लॉग का हर एक बिंदु अपने आप में एक पूरी किताब हो सकता है।
मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से एक ऐसी कम्युनिटी तैयार करना है, जो खुद को दिल से बदलना चाहती है और चीजों को गहराई से समझना चाहती है। इस ब्लॉग को लिखने में मैंने कड़ी मेहनत की है, क्योंकि यह आसान नहीं होता।
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